शिर Head सिर
जहाँ प्राणियों का प्राण रहता है तथा समस्त इन्द्रियाँ रहती हैं जो समस्त अंगों का चालक है व शिर है।
वायु पित्त बिगड़ जाने पर शिर में दर्द होता है जिससे कोई रोग पैदा हो सकता है। जो रोग शिर में दर्द पैदा करता है उसे शिरोरोग कहते हैं।
आचार्य सुश्रुत के मत से शिरोरोग 11 प्रकार के हैं:-
1. वातिक
2. पैत्तिक
3. श्लैष्मिक
4. रक्तज
5. सात्रिपातिक
6. क्षयज
7. कृमिज
8. सूर्यावर्त्त
9. अनन्तवात
10. अर्धावभेदक
11. शंखक
चरक ने 5 प्रकार के शिरोरोग का उल्लेख किया है:-
1. वातिक
2. पैत्तिक
3. श्लैष्मिक
4. त्रिदोषज
5. कृमिक
वाग्भट्ट ने 9 और शिरोरोगों का उल्लेख किया है जो कपाल के बाहरी भाग में होते हैं:-
1. उपशीर्षक
2. शिरोविद्राधि
3. शिरोग्रन्थि
4. शिरोअर्बुद
5. अरुंषिका
6. दारुणक
7. इन्द्रलुप्त
8. खालित्य
9. पलित
सिर दर्द
सिर दर्द कई प्रकार के होते हैं इसीलिए इनकी चिकित्सा भी अलग-अलग ढंग से की जाती है।सबसे पहले समझना होगा सिर दर्द की वज़ह क्या है और फिर चिकित्सा आसानी से हो पाएगी।
अपने शिर दर्द के कारण को जानने के लिए चिकित्सक से परामर्श करें।
आजकल सबसे ज्यादा शिर दर्द की समस्या का कारण गलत खानपान की आदतें हैं। खानपान की गलत आदतों को सुधारने पर ही सिर दर्द से पूर्ण रूप में निजात पायी जा सकती है। गलत खानपान की वज़ह से होने वाले सिरदर्द का उल्लेख किया जा रहा है।
रोज़ाना सुबह ख़ाली पेट 1 गिलास हल्का गर्म पानी पियें और दिनचर्या की शुरुआत करें। सुबह का नाश्ता फलों से करें। पेट भ फल खाएं। खट्टे मीठे सभी तरह के फ़ल जो मौसम के अनुरूप ताज़े फल आते है वो जी भर कर खाने चाहिए।
फ़ल खाने के 3 घंटे के बाद ही भोजन करें। भोजन ले साथ अधिक मात्रा में सलाद कच्ची सब्जियां जरूर खाएं। भोजन के बाद पानी सवा घंटे बाद पियें।
सिर दर्द के रोगी को दूध और दूध से बने सभी प्रकार के पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए। फैक्ट्री का बना कोई भी पदार्थ न खाएं।
शाम को 7 बजे से पहले भोजन कर लें। ज्यादा से ज्यादा 8 बजे तक भोजन कर लेना जरूरी होता है। इसके बाद किया गया भोजन बीमारियों का घर भर देता है। रात को भूख लगने पर फ़ल खाएं।
सिर के आगे के भाग में दर्द होना। दाये बाएं दोनों तरफ या किसी एक तरफ दर्द होना। आंखों तक दर्द आना। नीचे झुकने पर चक्कर आना और आंखों पर दबाव पड़ना आदि।
ऐसे सिरदर्द को माइग्रेन कहा जाता है।
माइग्रेन सिरदर्द की चिकित्सा
सूतशेखर रस
2-2 गोली
सुबह शाम भोजन से 1 घंटे पहले पानी के साथ लें।
अश्वगंधारिष्ट
15-20 ml
चंद्रप्रभा बट्टी
2-2 गोली
सुबह शाम भोजन से 1 घंटे बाद पानी मिला कर अश्वगंधारिष्ट के साथ लें।
रात को सोते समय 1 गोली हमदर्द इकसीर शिफा लेने से नींद भी अच्छी आती है और सिरदर्द और रक्तचाप भी ठीक होता है।
नीलगिरी के तेल में बराबर मात्रा में महानारायण तेल मिला कर रख लें। सिर दर्द होने पर 5-7 बूंदे माथे पर लगा कर मालिश करने से सिर दर्द में आराम मिलेगा।
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गर्दन में अकड़न महसूस होना। दोनों कानों के पीछे दर्द होना या किसी एक कान के पीछे आधे सिर में दर्द होना। पीछे के सारे सिर में दर्द होना जो कान तक जाए या गर्दन तक जाए। दोनों कंधों में दर्द होना या किसी एक कंधे में दर्द होना। सिर के ऊपरी हिस्से में दर्द होना आदि। ये सब सर्वाइकल से होने वाले सिरदर्द की ओर संकेत करते है। इसलिए इसको सर्विकोजेनिक सिरदर्द कहा जाता है।
सर्विकोजेनिक सिरदर्द की चिकित्सा
सूतशेखर रस 2-2 गोली
सुबह शाम भोजन से 1 घंटे पहले पानी के साथ लें।
महारास्नादि काढ़ा 15-20 ml
महायोगराज गुग्गुलु 1-1 गोली
चंद्रप्रभा बट्टी 2-2 गोली
सुबह शाम भोजन से 1 घंटे बाद पानी मिला कर महारास्नादि काढ़ा के साथ लें।
यूरिक एसिड बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन न करें। दूध दहीं लस्सी उड़द भिंडी अरबी गोभी और बासी भोजन का इस्तेमाल न करें।
महानारायण या निर्गुन्डी तेल से गर्दन की मालिश ऊपर से नीचे की तरफ करने से तत्काल आराम मिलता है।
हम मालिश का वीडियो बना कर डालने की कोशिश करेंगे।
किसी भी वजह से होने वाले सिरदर्द में नाक में देसी गाय का घी 2-2 बूंदे रात को सोने से पहले डालें। नाभि में घी डालने से विशेष लाभ मिलता है। पैरों के तलवों पर घी या तेल से मालिश करने से विशेष लाभ मिलता है।
आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें।
सारे सुख निरोगी काया।
कोई भी दवा चिकित्सक के परामर्श से ही प्रयोग करें।
Ayurved Sagar
Vaid Karamjeet Singh
ayurvedsagarkhanauri@gmail.com
1 Comments
Fantastic, i used this and cured very well.
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