सोरायसिस (Psoriasis): कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

सोरायसिस (Psoriasis): कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

परिचय
    सोरायसिस (Psoriasis) एक दीर्घकालिक (Chronic) त्वचा रोग है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) से संबंधित होता है। इस रोग में त्वचा की कोशिकाएँ सामान्य से बहुत तेजी से बनने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा पर लाल, मोटे और पपड़ीदार धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह रोग संक्रामक नहीं है, अर्थात यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। हालांकि, यह रोग व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

Psoriasis

आयुर्वेदिक परिचय
    कुष्टमंडल कहो या सोरायसिस एक ही रोग है। आयुर्वेद में सोरायसिस को कुष्टमंडल कहा जाता है। अगर किसी को सोरायसिस है और वह डॉक्टर के पास जाएगा तो सबसे पहले डॉक्टर बोलेगा कि इसका कोई इलाज नहीं है लेकिन किसी वैध के पास जाओगे तो वैध बोलेगा इलाज संभव है। आयुर्वेद जोकि हर चिकित्सा पद्धति की जननी है इसमें सोरायसिस का इलाज है लेकिन इलाज लंबा चलता है।

सोरायसिस क्या है?
    सामान्यतः त्वचा की कोशिकाएँ लगभग 28 से 30 दिनों में बनती और नष्ट होती हैं, लेकिन सोरायसिस में यह प्रक्रिया केवल 3 से 5 दिनों में पूरी हो जाती है। परिणामस्वरूप त्वचा की मृत कोशिकाएँ सतह पर जमा हो जाती हैं और मोटी, चांदी जैसी सफेद पपड़ियों का निर्माण करती हैं।

सोरायसिस के कारण
    सोरायसिस का सटीक कारण पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन निम्नलिखित कारक इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं:

1. प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी – शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएँ गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती हैं।
2. आनुवंशिक कारण – परिवार में किसी सदस्य को सोरायसिस होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है।
3. तनाव (Stress) – मानसिक तनाव रोग को बढ़ा सकता है।
4. संक्रमण – गले का संक्रमण और अन्य संक्रमण रोग को ट्रिगर कर सकते हैं।
5. त्वचा की चोट – कट, जलन या चोट के बाद सोरायसिस विकसित हो सकता है।
6. कुछ दवाइयाँ – कुछ दवाएँ रोग के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं।


सोरायसिस के लक्षण
    सोरायसिस के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
1. त्वचा पर लाल रंग के उभरे हुए धब्बे
2. चांदी जैसी सफेद पपड़ियाँ
3. खुजली, जलन या दर्द
4. त्वचा का सूखना और फटना
5. नाखूनों का मोटा होना या रंग बदलना
6. जोड़ों में दर्द और सूजन (Psoriatic Arthritis)

यह रोग आमतौर पर कोहनी, घुटनों, सिर की त्वचा, कमर और हाथ-पैरों पर अधिक दिखाई देता है।

सोरायसिस के प्रकार
1. प्लाक सोरायसिस (Plaque Psoriasis)
    यह सबसे सामान्य प्रकार है जिसमें लाल और पपड़ीदार धब्बे बनते हैं।
2. गुटेट सोरायसिस (Guttate Psoriasis)
    यह छोटे-छोटे लाल धब्बों के रूप में दिखाई देता है और बच्चों तथा युवाओं में अधिक पाया जाता है।
3. इनवर्स सोरायसिस (Inverse Psoriasis)
    यह त्वचा की सिलवटों जैसे बगल, कमर और स्तनों के नीचे होता है।
4. पस्टुलर सोरायसिस (Pustular Psoriasis)
    इसमें त्वचा पर मवाद भरे छोटे फफोले बन जाते हैं।
5. एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस (Erythrodermic Psoriasis)
    यह दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार है जिसमें शरीर का अधिकांश भाग लाल और सूजा हुआ दिखाई देता है।

निदान (Diagnosis)
    सोरायसिस की पहचान के लिए डॉक्टर:
त्वचा की जांच करते हैं।
रोगी का चिकित्सा इतिहास पूछते हैं।
आवश्यकता पड़ने पर त्वचा की बायोप्सी (Biopsy) कर सकते हैं।

उपचार
    हालांकि allopathy में सोरायसिस का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन उचित आयुर्वेदिक उपचार से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बहुत से लोगों को ठीक भी किया जा चुका है। 
1. बाहरी उपचार (Topical Treatment)
मॉइस्चराइज़र
कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम
विटामिन D युक्त क्रीम

2. फोटोथेरेपी (Phototherapy)
नियंत्रित पराबैंगनी (UV) किरणों द्वारा उपचार किया जाता है।

3. दवाइयाँ
इम्यूनोमॉड्यूलेटरी दवाएँ
बायोलॉजिकल थेरेपी
ओरल मेडिकेशन

4. आयुर्वेदिक चिकित्सा 
खाने की दवाएँ 
लगाने की दवाएँ 

5. अपथ्य:
    चाय, कॉफी, कोल्डड्रिंक, तेल, डालडा, रिफाइंड, गुड़, शक्कर, आचार, लाल, हरी मिर्च, भिंडी, आरवी, केला, उड़द की दाल, आम, किन्नू, मोसम्मी, लस्सी, बेर, तंबाकू, मीट, अंडा शराब।

उपचार हमेशा त्वचा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

बचाव और जीवनशैली
    सोरायसिस को नियंत्रित रखने के लिए निम्न उपाय लाभकारी हो सकते हैं:
1. तनाव कम करें।
2. त्वचा को हमेशा नम रखें।
3. धूम्रपान और शराब से बचें।
4. संतुलित आहार लें।
5. नियमित व्यायाम करें।
6. त्वचा को चोट और संक्रमण से बचाएँ।

निष्कर्ष
    सोरायसिस एक दीर्घकालिक त्वचा रोग है जो जीवनभर बना रह सकता है, लेकिन उचित आयुर्वेदिक उपचार और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। सही देखभाल और जागरूकता से सोरायसिस से प्रभावित व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

Dr Karamjeet Singh
Ayurved Sagar 

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